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!! दावत नामा !!
वाह क्या मर्तबा ए गौस हैं बाला तेरा! उंचो उंचो के सरो से हैं कदम आला तेरा!!
सर भला क्या कोई जाने के हैं कैसा तेरा!
औलिया मलते हैं आखे वो हैं तलवा तेरा!!
अल्हमदुलीलाह् सुमाँ अलहम्दुलीलाह् ब फैज ए रुहानी हजरत सुफी ए बा सफा सैय्यद चांदशाह वली अन्सारी मदनी रहे. और दादा हुजुर हजरत सैय्यद अल्ताफ हुसैन कादरी शुत्तारी रहे. जांब (बु) के फैज वो बरकात से
ब तारीख 16 ऑक्टोबर 2025 मुताबिक 23 रबी उल् आखीर 1447 हिजरी. ब रोज ए जुमेरात ब वक्त बाद नमाज ए मगरीब ब मुक्काम वाढोना (बु) में *ईद ए गौसिया (11वी) शरीफ* के मुक्कदस मोके पर नियाज वो फातिहा मुन्नाकिद की जा रही हैं! जिस मे लंगर ए गौसिया के बाद महेफिल ए मिलाद (समाँ ख्वानि) का रुहानी अंमल ख्याम में आएगा
लिहाजा तमाम आशिक ए गौस अल आजम दस्तगीर रहे. से मुअदेबाना गुजारिश की जाती हैं के कसीर तादाद मे शिर्केत फर्मा कर फैजान ए कादरी से फैजियाब हो
*जेरे सर परस्ती*
हजरत मौलाना सैय्यद अब्दुलकादिरहुसैन अल्ताफ हुसैन सहाब जांब वाले
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